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भेड़िये और सारस की कहानी | Bhedia Aur Saras Ki Kahani

भेड़िये और सारस की कहानी | Bhedia Aur Saras Ki Kahani Moral Story for Kids: एक जंगल में एक दुष्ट और लालची भेड़िया रहता करता था। एक दिन, उसने एक हिरण का पीछा किया और उसे शिकार किया। लेकिन बजाय खुशी के, उसने खुद को लालच में डूबा दिया और जल्दी-जल्दी अपने शिकार को खाने लगा। इसी बीच में, वह एक हड्डी से लबालब हो गया, जो उसके गले में फंस गई।

Gale ki haddi nikal do
Gale ki haddi nikal do

भेड़िया की मुसीबत थी और वह परेशान हो गया। अब वह ना खा सकता था और ना ही पी सकता था। वह कई कोशिशें की ताकि हड्डी निकल जाए, परंतु सब बेकार रह गई।

आखिरकार, उसने सोचा कि कुछ करना होगा, और उसने तय किया कि किसी से मदद मांगनी चाहिए। वह सोचने लगा कि कौन हो सकता है जो उसके गले से हड्डी निकाल सकता है। फिर उसे सारस का याद आया। सारस के पास लम्बी गर्दन और एक तीक्ष्ण चोंच था, जिससे वह बड़ी आसानी से हड्डी को बाहर निकाल सकता था।

Sara haddi nikal deta hai
Sara haddi nikal deta hai

भेड़िया बिना देर किए सारस के पास पहुंचा और बोला, “सारस भाई! मेरे गले में एक हड्डी फंस गई है। क्या तुम अपनी चोंच से उसे निकाल सकते हो? मैं तुम्हारा आभारी रहूँगा और तुम्हें उचित पुरस्कार भी दूँगा।”

सारस पहले तो डर गया, जब उसने भेड़िये की तरफ देखा, लेकिन फिर उसके दिल में दया आ गई और वह तैयार हो गया।

भेड़िया मुँह खोलकर खड़ा हो गया और सारस ने अपनी चोंच भेड़िये के मुँह में डाल दी। परंतु हड्डी को बाहर निकालने के लिए, वहे को अपनी आधी गर्दन भी भेड़िये के मुँह में डालनी पड़ी।

Mera puraskar kaha hai
Mera puraskar kaha hai

इसके कारण, भेड़िया के मन में लालच का भाव उत्पन्न हुआ, वह सोचने लगा कि अगर मैं इस लाजवाब गर्दन को चबा पा लूं, तो मेरा खाने का मज़ा ही और बढ़ जाएगा। लेकिन इसी दौरान, उसे अपने गले में फंसी हड्डी को निकलनी थी, इसलिए वह मना कर गया।

कुछ ही देर में, सारस ने भेड़िये के गले से हड्डी निकाल दी। हड्डी निकलते ही, भेड़िया तुरंत वहाँ से चला गया, बिना किसी धन्यवाद या पुरस्कार के।

सारस ने उसे रोककर कहा, “मेरा पुरस्कार कहाँ है? तुमने कहा था कि तुम इस काम के बदले मुझे पुरस्कार दोगे।”

Bhediye ne kaha tum salamat ho
Bhediye ne kaha tum salamat ho

भेड़िया ने उत्तर दिया, “एक भेड़िये के मुँह में अपनी गर्दन डालकर भी तुम सही-सलामत हो, क्या यह तुम्हारा पुरस्कार नहीं है?”

बच्चों के लिए सबक

भेड़िये और सारस की कहानी (Bhedia Aur Saras Ki Kahani) में सारस ने सीख लिया कि दुष्ट और क्रूर व्यक्ति से कभी कृतज्ञता या प्रशंसा की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

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Bhediya Aur Saras Ki Kahani In English | The Wolf And Crane Story

There lived an evil and greedy wolf in a forest. One day, he chased a deer and hunted it. But instead of happiness, he gave himself up to greed and began to quickly eat his prey. In the meantime, he was hit by a bone, which got stuck in his throat.

Gale ki haddi nikal do
Gale ki haddi nikal do

The wolf was in trouble and became upset. Now he could neither eat nor drink. He made several attempts to remove the bone, but all remained in vain.

Finally, he thought something had to be done, and he decided to ask someone for help. He started wondering who could be the one who could remove the bone from his neck.

Then he remembered the crane. The stork had a long neck and a sharp beak, with which it could easily take out the bone.

Sara haddi nikal deta hai
Sara haddi nikal deta hai

The wolf reached the stork without any delay and said, “Brother stork! There’s a bone stuck in my throat.

Can you take it out with your beak? I will be grateful to you and will also give you appropriate reward.”

The stork was scared at first when he looked at the wolf, but then he felt pity and agreed.

Mera puraskar kaha hai
Mera puraskar kaha hai

The wolf stood up with its mouth open and the crane put its beak into the wolf’s mouth. But to get the bone out, he had to put half of his neck into the wolf’s mouth.

Due to this, a feeling of greed arose in the mind of the wolf, he started thinking that if I could chew this wonderful neck, then the pleasure of eating it would increase even more.

But during this time, he had to remove the bone stuck in his throat, so he refused.

Bhediye ne kaha tum salamat ho
Bhediye ne kaha tum salamat ho

Within a short time, the crane removed the bone from the wolf’s neck. As soon as the bone was found, the wolf immediately left the place, without any thanks or reward.

The stork stopped him and said, “Where is my prize? You said you would reward me for this work.”

The wolf replied, “You are safe despite putting your neck in a wolf’s mouth, isn’t that your reward?”

Moral Lesson For Kids

From “The Wolf And Crane Story” the stork learned that one should never expect gratitude or praise from an evil and cruel person.

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